भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका और इसके फ़ायदे Bhramari Pranayama in hindi

भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका और इसके फ़ायदे Bhramari Pranayama in hindi :-

तनाव Depression - हमारी जीवन में जड़ें जमाता जा रहा हैं| यहाँ तक इस तनाव नामक चीज ने बच्चों को भी नहीं छोड़ा हैं जहाँ बच्चों में पढाई व अच्छे नंबर लाने की चिंता और वहीँ बड़ों को परिवार चलने की तो किसी को अपने सपने को पूरा करने की चिंता हैं |

अधिक तनाव हमारें शरीर के लिए परेशानी का कारण बन सकता हैं| दोस्तों तनाव को दूर करने का बहुत ही आसान और मुफ्त का तरीका हैं भ्रामरी प्राणायाम, तनाव को कम करने का बहुत कारगर योग हैं |

इस(yoga) को करने से थकान, नींद का न आना और बुद्धि भी तेज होती हैं तो चलिए जानते हैं इसके फायदें और करने का तरीका (Bhramari pranayama in Hindi)

भ्रामरी प्राणायाम क्या है Bhramari Pranayama in Hindi

भ्रामरी शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द 'भ्रमर' से हुई जिसका अर्थात भंवरे जैसी गूंज होती है इसलिए इसे भ्रामरी प्राणायाम कहते है | यह प्राणायाम हमारे दिमाग और मन को शांत करने में बहुत लाभकारी हैं | यह प्राणायाम करना बहुत सरल और इसको किसी भी जगह कर सकते हैं |

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Bhramari Pranayama in hindi

भ्रामरी प्राणायाम लाभ Bhramari pranayama benefits


1. भामरी प्राणायाम से अनिंद्रा, क्रोध, चिंता दूर होती हैं |
2. गर्भवती महिलाओं के लिए भ्रामारी प्राणायाम वरदान का कम करता है |
3. इससे अच्छी नींद आती हैं और सिर दर्द दूर होता हैं |
4. इसकी प्रक्रिया ठीक से सीखकर करते हैं तो इससे हृदय और फेफड़े सशक्त बनते हैं |
5. उच्च-रक्तचाप सामान्य होता हैं हकलाहट और तुतलाहट भी इसके नियमित रूप से दूर होती हैं |
6. यादाश्त और बुद्धि तेज होती हैं माइग्रेन व साइनोसाइटीस से पीड़ितों के लिए बहुत लाभकारी है |
7. इसको ठुड्डी को गले से लगा कर करने से थाईरोइड रोग में फायदा मिलता हैं |
8. वासना की मानसिक और भावनात्मक प्रभाव को कम करता हैं |
9. भ्रामरी प्राणायाम को लम्बे समय तक करते रहने से हमारी आवाज मधुर और सुरीली हो जाती हैं |

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भ्रामरी प्राणायाम विधि Bhramari Pranayama steps


1. सबसे पहले एक साफ़ और समतल जगह पर चटाई बिछाकर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएँ |
2. भ्रामरी आसन को सूर्योदय या सूर्यास्त दोनों वक्त कर सकते हैं |
3. आप अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाकर कंधो के समांतर ले जाएँ |
4. अपने हाथों को कोहनियों से मोड़कर अपने कानों के पास ले जाएँ |
5. अब अपने दोनों हाथों के अंगूठों से अपने दोनों कानों को बंद कर लें |
6. इस प्राणायाम में नाक से श्वांस भर कर धीरे-धीरे गले से भ्रमर की आवाज के साथ श्वांस छोड़ें |
7. साँस बाहर छोड़ते हुए (ॐ) का आवाज निकालें |
8. सुरुआत में आप 5 से 7 मिनट तक करें फिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं| तो दोस्तों आपने जाना Bhramari Pranayama benefits in hindi  चलिए इसको करते समय क्या-क्या सावधानि करते हैं इसके बारे में जानते हैं |

भ्रामरी प्राणायाम सावधानियां Bhramari Pranayama Precautions            

1. कानों में किसी प्रकार का संक्रमण या दर्द हो तो इस प्राणायाम को बिलकुल ना करें |
2. भ्रामरी प्राणायाम करते वक्त दोनों कानों के पर्ण की मदद से कान ढकने होते हैं, अपनी उँगलियों को अंदर नहीं डालना हैं |
3. इस योग को करते समय अगर खासी, सिर दर्द होने लगे, चक्कर आना या किसी अन्य प्रकार की परेशानी होने लगे तो भ्रामरी प्राणायाम न करें |
4. हमेशा सुबह के समय खाली पेट करें और शाम का भोजन लेने के समय के बीच कम से कम 2 से 3 घंटे का अंतर जरुर रखनें |


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